Share market 29 Sep, 2026 291 views

शेयर बाजार में गिरावट क्यों? कच्चा तेल, US Bond Yield और रुपये का दबाव

भारतीय शेयर बाजार पर इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। जानिए बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें और आज निवेशकों की नजर किन संकेतों पर रहेगी।
शेयर बाजार में गिरावट क्यों? कच्चा तेल, US Bond Yield और रुपये का दबाव
शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? भारतीय शेयर बाजार में पिछले सत्र में तेज बिकवाली देखने को मिली। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़े कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी Treasury Bond Yield में तेजी और कमजोर ग्लोबल सेंटीमेंट शामिल हैं। 29 सितंबर की सुबह GIFT Nifty करीब 22,820 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि Brent crude करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ था। वहीं अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 5.24% के ऊंचे स्तर पर रही। 1. कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil महंगा होता है तो भारत के लिए import bill बढ़ सकता है। Brent crude मंगलवार सुबह करीब $106 प्रति बैरल के आसपास था। तेल की कीमतों में तेजी का असर रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो बाजार में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। 2. US 10-Year Bond Yield में बड़ा उछाल अमेरिकी 10-year Treasury yield सोमवार रात बढ़कर करीब 5.27% तक पहुंच गई, जो लगभग 19 साल का ऊंचा स्तर बताया गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है क्योंकि निवेशकों के लिए सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड की आकर्षकता बढ़ती है। इससे emerging markets जैसे भारत से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव भी बढ़ सकता है। 3. रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के करीब कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। 28 सितंबर को रुपया करीब ₹96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हुआ और 96.03 पर बंद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार RBI के हस्तक्षेप से रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद मिली। कमजोर रुपये से भारत का oil import bill और महंगा हो सकता है, जिससे बाजार की चिंता बढ़ती है। 4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। 29 सितंबर की बाजार रिपोर्ट के अनुसार पिछले सत्र में FIIs ने करीब ₹5,353 करोड़ की भारतीय इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने करीब ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की। अगर विदेशी बिकवाली जारी रहती है तो बाजार पर अतिरिक्त दबाव देखा जा सकता है। 5. RBI की ब्याज दर पर भी नजर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई की चिंता के बीच बाजार की नजर RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर भी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में RBI द्वारा संभावित दर बढ़ोतरी को लेकर दांव बढ़ रहे हैं। भारतीय कंपनियां भी संभावित दर बढ़ोतरी से पहले बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने की कोशिश कर रही हैं। ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों की borrowing cost बढ़ सकती है और इसका असर निवेश तथा earnings sentiment पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार भी कमजोर भारतीय बाजार के लिए अमेरिकी बाजार भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। सोमवार को Dow Jones करीब 0.67%, S&P 500 करीब 0.77% और Nasdaq करीब 0.92% नीचे बंद हुए। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और एशियाई बाजारों में गिरावट ने भारतीय बाजार के लिए भी sentiment कमजोर किया है। आज निवेशकों की नजर किन चीजों पर रहेगी? आज बाजार में मुख्य रूप से इन संकेतकों पर नजर रहेगी: - Brent crude oil की कीमत - US 10-year Treasury yield - रुपया बनाम डॉलर - FII और DII activity - RBI की ब्याज दर को लेकर संकेत - US-Iran और Middle East से जुड़ी खबरें - Asian और European markets की चाल बाजार में आगे क्या हो सकता है? फिलहाल बाजार के सामने कई global risk factors हैं। खासकर crude oil और US bond yields अगर ऊंचे बने रहते हैं तो volatility जारी रह सकती है। दूसरी तरफ crude oil में गिरावट, geopolitical तनाव में कमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार के sentiment को बदल सकती है। इसलिए अगले कुछ कारोबारी सत्रों में तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत रहेंगे। निष्कर्ष भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट को सिर्फ एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। कच्चे तेल की तेजी + अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल + कमजोर रुपया + विदेशी बिकवाली + global risk-off sentiment ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में global cues और RBI से जुड़े संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार की मौजूदा परिस्थितियों की जानकारी देने के लिए है। इसे निवेश सलाह या किसी शेयर को खरीदने-बेचने की सिफारिश न माना जाए।
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