News 17 Sep, 2026 193 views

भारत ने पाकिस्तान-चीन जॉइंट बाउंड्री कमीशन को क्यों बताया अवैध? जानिए पूरा विवाद

भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच सक्रिय किए गए जॉइंट बाउंड्री कमीशन को कानूनी आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है। विवाद की जड़ 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों से जुड़ी है।
भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसी बीच पाकिस्तान और चीन ने अपने सीमा संबंधी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए Pakistan-China Boundary Joint Commission को सक्रिय किया है। इस आयोग की पहली बैठक 16 सितंबर 2026 को इस्लामाबाद में हुई। पाकिस्तान ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वेक्षण, व्यापार तथा कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर सहयोग की बात कही। लेकिन भारत ने इस कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस तथाकथित जॉइंट कमीशन को स्वीकार नहीं करता और इसे कोई कानूनी आधार प्राप्त नहीं है। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान को उन क्षेत्रों के संबंध में किसी दूसरे देश के साथ समझौता करने का अधिकार नहीं है, जिन्हें भारत अपना क्षेत्र मानता है। विवाद की जड़ 1963 का समझौता इस पूरे मामले को समझने के लिए 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को समझना जरूरी है। 2 मार्च 1963 को चीन और पाकिस्तान ने एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत ने शुरुआत से ही इस समझौते को मान्यता नहीं दी है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंपा था। भारत इसे अपने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा मानता है और समझौते को अवैध तथा अमान्य बताता है। यही वजह है कि जब पाकिस्तान और चीन सीमा संबंधी किसी संयुक्त व्यवस्था को आगे बढ़ाते हैं, तो भारत उसे अपने क्षेत्रीय दावे के संदर्भ में देखता है। भारत का क्या कहना है? भारत का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान को उन क्षेत्रों के संबंध में कोई व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है जिन्हें भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र मानता है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी कोई सीमा व्यवस्था, जिसमें भारतीय दावे वाले क्षेत्र शामिल हों, भारत की संप्रभुता की स्थिति को प्रभावित नहीं कर सकती। पाकिस्तान और चीन क्यों आगे बढ़ा रहे हैं यह व्यवस्था? पाकिस्तान के अनुसार, जॉइंट कमीशन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को संस्थागत बनाना है। इसमें सीमा सर्वेक्षण, सीमा से जुड़े व्यावहारिक मुद्दे, व्यापार और सीमा पार कनेक्टिविटी जैसे विषय शामिल हैं। पाकिस्तान इसे अपने और चीन के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बता रहा है। इसका एक व्यावहारिक पहलू भी है। चीन और पाकिस्तान के बीच खुनजराब क्षेत्र के जरिए व्यापार और आवाजाही होती है तथा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC भी इसी व्यापक क्षेत्र से जुड़ा है। भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान विवाद से इसका क्या संबंध है? यह मामला केवल चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में पाकिस्तान भारत की ओर से फैसला नहीं कर सकता। दूसरी तरफ पाकिस्तान और चीन अपनी सीमा व्यवस्था को अपने द्विपक्षीय संबंधों के हिस्से के रूप में देखते हैं। इसलिए दोनों पक्ष इस मुद्दे को अलग-अलग कानूनी और राजनीतिक दृष्टिकोण से देखते हैं। क्या इससे भारत-चीन तनाव बढ़ सकता है? इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि आयोग के सक्रिय होने से कोई नया सैन्य संकट पैदा होगा। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अगस्त 2026 में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की बातचीत हुई थी। दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न पर बातचीत जारी रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने की बात कही थी। इसलिए वर्तमान स्थिति में एक तरफ भारत पाकिस्तान-चीन सीमा व्यवस्था पर आपत्ति जता रहा है, जबकि दूसरी तरफ भारत और चीन के बीच अपने अलग सीमा विवाद को बातचीत के जरिए संभालने की प्रक्रिया भी चल रही है। आगे क्या होगा? अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि पाकिस्तान और चीन का जॉइंट कमीशन आगे किन मुद्दों पर काम करता है और क्या उसकी गतिविधियां भारत द्वारा दावा किए गए क्षेत्रों से संबंधित होती हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी किसी व्यवस्था को उसकी संप्रभुता की स्वीकृति नहीं माना जाएगा। FAQ Q1. पाकिस्तान-चीन जॉइंट बाउंड्री कमीशन क्या है? यह पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा प्रबंधन और सीमा से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर सहयोग के लिए बनाया गया संयुक्त तंत्र है। Q2. भारत ने इसका विरोध क्यों किया? भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उन क्षेत्रों से संबंधित समझौते करने का अधिकार नहीं है जिन्हें भारत अपना क्षेत्र मानता है। Q3. 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता क्या है? 1963 में चीन और पाकिस्तान ने सीमा समझौता किया था। भारत ने इसे मान्यता नहीं दी और इसे अवैध एवं अमान्य बताया है। Q4. शक्सगाम घाटी विवाद क्यों महत्वपूर्ण है? भारत के अनुसार 1963 के समझौते में पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंपा था, जिसे भारत लद्दाख का हिस्सा मानता है। Q5. क्या जॉइंट कमीशन से भारत की सीमा बदल गई है? नहीं। आयोग की सक्रियता अपने आप भारत की सीमा या संप्रभुता की कानूनी स्थिति को बदल नहीं देती। भारत ने भी कहा है कि ऐसी व्यवस्था से उसके दावे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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